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    इतिहास

    अभिलेखागार (Archives) उन सरकारी अभिलेखों के संकलन का परिणाम हैं, जिनका वर्तमान प्रशासनिक कार्यों में नियमित उपयोग समाप्त हो चुका होता है। इन अभिलेखों में उन लोगों के अनुभव और घटनाओं का विवरण निहित होता है, जिन्होंने इतिहास के निर्माण में योगदान दिया है। इन अभिलेखों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जाता है, क्योंकि इनका उपयोग सरकारी कार्यों को सुचारु रूप से चलाने, सार्वजनिक एवं निजी अधिकारों की रक्षा करने तथा सबसे महत्वपूर्ण रूप से विद्वानों और इतिहासकारों द्वारा शोध कार्य करने में होता है। अभिलेखों के आधार पर सरकार अपनी योजनाएँ सफलतापूर्वक तैयार कर सकती है। अभिलेखागार इतिहास लेखन के लिए सामग्री उपलब्ध कराते हैं और लिखित इतिहास में वर्णित तथ्यों की सत्यता का पता लगाने में सहायता करते हैं।

    हरियाणा राज्य अभिलेखागार का मुख्य कार्य ऐतिहासिक, प्रशासनिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले सार्वजनिक और निजी अभिलेखों को प्राप्त करना, उनका उपयोग सुनिश्चित करना तथा उन्हें भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक अभिलेखों के प्रबंधन, संरक्षण और अनुपयोगी अभिलेखों के निस्तारण से संबंधित सभी कार्यों में समन्वय स्थापित करना और मार्गदर्शन देना भी विभाग का प्रमुख कार्य है, ताकि स्थायी महत्व वाले अभिलेख नष्ट न हों। विभाग राज्य के स्वतंत्रता सेनानियों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों के संस्मरणों को टेप पर रिकॉर्ड करता है तथा ऐतिहासिक अनुसंधान और अध्ययन को प्रोत्साहित करता है।

    1 नवंबर, 1966 को पंजाब के पुनर्गठन और हरियाणा राज्य के गठन के समय हरियाणा में कोई स्वतंत्र अभिलेखागार विभाग नहीं था। इसलिए राज्य में सार्वजनिक और निजी अभिलेखों के संरक्षण की दिशा में विशेष ध्यान नहीं दिया जा सका। वर्ष 1969 में शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य में पुरातात्त्विक और अभिलेखीय हितों की देखभाल के लिए एक पुरातत्त्व प्रकोष्ठ (Archaeological Cell) बनाया गया। इसके बाद हरियाणा राज्य अभिलेखागार की स्थापना के लिए पत्र संख्या 2005-Edu.II(6E)-73/35548, दिनांक 12.12.1973 के माध्यम से सात पदों वाले एक प्रारंभिक कर्मचारी ढाँचे को स्वीकृति प्रदान की गई। निस्संदेह, इनमें से कुछ पद वर्ष 1974 में ही भर दिए गए थे, लेकिन अभिलेखागार के उपनिदेशक का पद सितंबर 1975 में भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार से एक अधिकारी को प्रतिनियुक्ति पर लाकर ही भरा जा सका। इसके बाद वर्ष 1976 में हरियाणा राज्य अभिलेखागार एक स्वतंत्र विभाग बन गया।

    अपनी स्थापना के बाद से ही विभाग तेजी से प्रगति कर रहा है। कार्यभार और अभिलेखों की संख्या में वृद्धि होने के कारण वर्ष 1986 में हिसार और अंबाला में दो क्षेत्रीय अभिलेखागार केंद्र खोले गए। इसके बाद दो और मंडलों के गठन के साथ वर्ष 1997 में रोहतक और गुरुग्राम में दो अतिरिक्त क्षेत्रीय अभिलेखागार केंद्र खोले गए। हालाँकि, प्रशासनिक कठिनाइयों के कारण वर्ष 2014 में गुरुग्राम के क्षेत्रीय अभिलेखागार केंद्र को रोहतक स्थित मिनी सचिवालय भवन में स्थानांतरित करना पड़ा। मुख्यालय तथा क्षेत्रीय अभिलेखागार केंद्रों के लिए स्वीकृत पदों का विवरण परिशिष्ट-I में दिया गया है।

    अभिलेखागार विभाग हरियाणा सरकार के अभिलेखागार विभाग के आयुक्त एवं सचिव के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है। विभाग के निदेशक विभागाध्यक्ष होते हैं। ये दोनों अधिकारी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से संबंधित हैं। विभाग की सभी अभिलेखीय गतिविधियों की देखरेख अभिलेखागार के उपनिदेशक द्वारा की जाती है, जो कार्यालय के प्रमुख होते हैं। समय-समय पर विभिन्न अधिकारियों द्वारा धारण किए गए पदों को दर्शाने वाला चार्ट परिशिष्ट-II में दिया गया है।

    अभिलेखागार विभाग का मुख्यालय सिंचाई भवन, बी-ब्लॉक, चौथी मंजिल, सेक्टर-5, पंचकूला में स्थित है। मुख्यालय कार्यालय के अतिरिक्त, विभाग के मंडल स्तर पर तीन क्षेत्रीय अभिलेखागार केंद्र हैं, जो अंबाला, हिसार और रोहतक में स्थित हैं। इन कार्यालयों के प्रमुख सहायक निदेशक होते हैं।