संरक्षण
माइक्रोफिल्म एवं प्रतिलिपि निर्माण (Microfilm & Reprography)
अभिलेखागार का प्रतिलिपि निर्माण अनुभाग माइक्रोफिल्म कैमरा, माइक्रोफिल्म रीडर, ज़ेरॉक्स मशीन, फोटोग्राफी कैमरा तथा फोटोग्राफी से संबंधित अन्य उपकरणों से सुसज्जित है। विभाग के अभिलेखों को माइक्रोफिल्म के रूप में सुरक्षित रखने के लिए अब तक लगभग सौ माइक्रोफिल्म रीलों का उपयोग किया जा चुका है।
राज्य अभिलेखागार में वास्तविक एवं पात्र शोधार्थियों को उनकी रुचि के अभिलेखों का अध्ययन करने के लिए आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, शोधार्थियों को उनकी आवश्यकता के अनुसार दस्तावेज़ों की ज़ेरॉक्स प्रतियाँ अथवा माइक्रोफिल्म प्रतियाँ मामूली शुल्क पर उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था है।
अभिलेखों का परिरक्षण (Preservation of Records)
विभाग न केवल अभिलेखों और पुस्तकों को धूल, गर्मी, प्रकाश, आर्द्रता तथा कीटों आदि जैसे अभिलेखों के शत्रुओं से सुरक्षित रखने का प्रयास करता है, बल्कि वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से उन्हें भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित भी करता है।
अभिलेखों की दैनिक तथा समय-समय पर सफाई हाथों से और वैक्यूम क्लीनर की सहायता से की जाती है। अभिलेखों को फफूँद के प्रकोप से बचाने के लिए विभाग में थाइमॉल द्वारा धूमन (Fumigation) की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
अभिलेखों की पुनर्स्थापना (Restoration)
राज्य अभिलेखागार में एक पूर्णतः विकसित पुनर्स्थापना इकाई है, जहाँ पुराने तथा नाज़ुक दस्तावेज़ों का नवीनतम तकनीकों के अनुसार वैज्ञानिक ढंग से उपचार किया जाता है। इस प्रक्रिया में कागज़ों के किनारों और कोनों को सुरक्षित रखने तथा मूल अभिलेखों को होने वाली क्षति को न्यूनतम करने के लिए विशेष सावधानी बरती जाती है।
प्राथमिक उपचार के रूप में सबसे पहले दस्तावेज़ों की छोटी-मोटी मरम्मत की जाती है। ऐसे कागज़ों का अम्ल-निष्कासन (De-acidification) किया जाता है, जिन पर ऐसी स्याही से लिखा गया हो जिसे धोकर हटाया नहीं जा सकता।
नाज़ुक दस्तावेज़ों की मरम्मत हाथ से लैमिनेशन करने की प्रक्रिया द्वारा की जाती है। इसमें सेल्यूलोज़ एसीटेट की पन्नी, टिश्यू पेपर तथा एसीटोन का उपयोग किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, कुछ दस्तावेज़ों की मरम्मत टिश्यू पेपर और कार्बोक्सिल मिथाइल सेल्यूलोज़ सोडियम सॉल्ट के पेस्ट की सहायता से भी की जाती है। जिन दस्तावेज़ों पर केवल एक ही तरफ लिखा होता है, उनकी पिछली सतह पर पूरी तरह पेस्ट लगाकर उनका उपचार किया जाता है।
कीड़ों द्वारा खाए गए दस्तावेज़ों की मरम्मत उन्हें उपयुक्त आधार-पत्रों में जड़ने अथवा रिक्त स्थानों को भरने की प्रक्रिया (Inlaying) द्वारा की जाती है। इसके बाद अभिलेखों और पुस्तकों की सिलाई तथा जिल्दबंदी की जाती है।
इस संरक्षण प्रक्रिया की एक उल्लेखनीय विशेषता यह है कि सिलाई के दौरान सुई मूल दस्तावेज़ को नहीं छूती है। इस प्रकार दस्तावेज़ों को सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जाता है।